[SSNI-452] विवाहित महिला के विशाल स्तन बेकाबू हो गए! ग्रीष्म उत्सव के बाद उन्मादपूर्ण संभोग और वीर्यपात
ग्रीष्म उत्सव की चहल-पहल थमने के साथ ही, विवाहित मिसाकी युकाटा पहने अकेली गली से अपने घर की ओर चल पड़ी, उसके गाल हल्के नशे से लाल थे। अचानक, बड़े-बड़े हाथों ने पीछे से उसका मुंह ढक लिया और उसे घसीटकर एक सुनसान मंदिर के गोदाम में ले गए। उसका युकाटा ज़बरदस्ती फाड़ दिया गया, उसके बर्फ़ जैसे सफ़ेद स्तन बाहर निकल आए, रात की ठंडी हवा में उनके निप्पल खड़े हो गए। उस आदमी की खुरदरी उंगलियों ने उसके स्तनों को नोचा, जबकि उसका दूसरा हाथ उसकी स्कर्ट के नीचे पहुँचकर भीगे हुए कपड़े के ऊपर से उसकी योनि को मसलने लगा। मिसाकी ने संघर्ष किया, लेकिन उसे धूल भरे वेदी पर धकेल दिया गया, उसके पैर ज़बरदस्ती फैला दिए गए। एक मोटा, कठोर लिंग बिना किसी चेतावनी के उसके अंदर घुस गया, धक्कों से चिपचिपा तरल पदार्थ निकला, शांत रात में मांस के टकराने की आवाज़ें साफ़ सुनाई दे रही थीं। उसने कराहों को दबाने के लिए अपने होंठ काट लिए, लेकिन आनंद की लहरों को रोक नहीं सकी, अंततः उस आदमी के हिंसक धक्कों के कारण उसका मूत्राशय बेकाबू हो गया, गाढ़ा वीर्य उसके कांपते गर्भाशय में भर गया।













